केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुहिन कांत पांडेय को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। वह माधबी पुरी बुच का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 28 फरवरी 2025 को समाप्त हो रहा है। पांडेय की नियुक्ति तीन वर्षों के लिए की गई है, जो सेबी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तुहिन कांत पांडेय का परिचय
तुहिन कांत पांडेय 1987 बैच के ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और बर्मिंघम विश्वविद्यालय, यूके से एमबीए की डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर के दौरान, पांडेय ने केंद्र और राज्य सरकारों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिससे उन्हें वित्तीय नीतियों और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है।
पेशेवर सफर और उपलब्धियां
सेबी चेयरमैन नियुक्त होने से पहले, पांडेय वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव के रूप में कार्यरत थे। इससे पूर्व, उन्होंने निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने सरकारी विनिवेश कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नेतृत्व में, एयर इंडिया का सफल निजीकरण और एलआईसी का सार्वजनिक सूचीकरण जैसे प्रमुख कार्य संपन्न हुए। इसके अलावा, पांडेय ने नए आयकर विधेयक की तैयारी और मध्यम वर्ग को कर राहत प्रदान करने वाले उपायों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सेबी के सामने चुनौतियाँ और पांडेय की भूमिका
सेबी के नए चेयरमैन के रूप में, तुहिन कांत पांडेय के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियाँ होंगी:
- बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करना: वर्तमान में शेयर बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। पांडेय को निवेशकों का विश्वास बहाल करने और बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
- निवेशकों की सुरक्षा: बढ़ती धोखाधड़ी और फिनइंफ्लुएंसर्स के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने की घटनाओं को रोकना एक प्रमुख चुनौती होगी।
- नए निवेश उत्पादों को प्रोत्साहन: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे नए निवेश साधनों को लोकप्रिय बनाना और निवेशकों को इनके प्रति जागरूक करना आवश्यक होगा।
- नियामकीय सुधार: बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और हितों के टकराव से बचने के लिए नए नियमों और नीतियों को लागू करना होगा।
- तकनीकी उन्नति: बाजार में तकनीकी गड़बड़ियों की त्वरित पहचान और समाधान के लिए एक मजबूत प्रणाली विकसित करना आवश्यक होगा।
सेबी चेयरमैन के रूप में पांडेय की प्राथमिकताएँ
अपने नए पद पर, तुहिन कांत पांडेय की प्राथमिकताएँ निम्नलिखित होंगी:
- निवेशकों का विश्वास बहाल करना: पारदर्शिता और सख्त निगरानी के माध्यम से निवेशकों का विश्वास पुनः स्थापित करना।
- नवाचार को प्रोत्साहन: नए वित्तीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा देना, जिससे बाजार में विविधता और गहराई आए।
- नियामकीय ढांचे का सुदृढ़ीकरण: बाजार में अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करना।
- तकनीकी सुधार: बाजार की निगरानी और संचालन में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करना, जिससे धोखाधड़ी और गड़बड़ियों को रोका जा सके।
निष्कर्ष
तुहिन कांत पांडेय की सेबी चेयरमैन के रूप में नियुक्ति भारतीय वित्तीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। उनके व्यापक अनुभव और नेतृत्व कौशल से उम्मीद है कि वे सेबी को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे, जिससे भारतीय पूंजी बाजार में स्थिरता, पारदर्शिता और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।

